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Brijlala Rohanअन्वेषी

Romance

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Brijlala Rohanअन्वेषी

Romance

लोग क्या कहेंगें ???

लोग क्या कहेंगें ???

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कर ली मैंने प्रेम किसी से ! संग जीवन जीना चाहा साथ उसी के साथ, उसी से ।

हमसफ़र बन साथ उसका निभाना है। सपना वो तो है ही मेरी !

हकीकत भी उसे ही बनानी है। पर एक प्रश्न कानों में गूँजती !

निराशा के क्षणों को झकझोलती ! कि लोग क्या कहेंगे ? 


पर चिंता हमें लोगों की नहीं ! जो कहना है ,कह लेने दो ! 

वो अपनी जगह हैं ,हम भी अपनी जगह !

हमें अपनी - अपनी जगह रह लेने दो ! जो कहना है ,कह लेने दो ।

    

आखिर कब तक हम लोगों के हुक्म ही सुनेंगे ।

जिसे पसंद किया है ,साथी ! हम तो उन्हें ही चुनेंगे ।

साथ जिंदगी उन्हें थोड़ी है बितानी ! कि जिस खूँटे बाँध दिये हम बन जाये उसकी निशानी ।

जिसे मैंने अपना बनाया ,उसे ही मंगलसूत्र पहनाना है ।

माँग में सिंदूर भर सात जन्म क्या! आने वाले हर जन्म में अपनी दुल्हन उसे ही बनाना है ।

हम कायर थोड़े ही हैं !कि किसी के आँख दिखाने से दूबक जायेंगें !

साथ मिलकर हम मुकाबला करेंगें एक- दूजे के वास्ते ।

हमलोगों चलेंगे हाथों में डाल हाथ एक ही रास्ते ।


कह लेने दो ,जो कहना उन्हें । यदि हम ये कहने लगेगें कि लोग क्या कहेंगे ?

तो फिर लोगों के पास कहने के लिए क्या बचेगा ?? जो कहना है ,कह लेने दो उन्हें ।


लोग मुझे चाहे घमण्डी कहें ! या कहें इज्जतखोर! पर मुझे इसकी कोई परवाह नहीं !

मचा लेने दो उन्हें, जितनी मचानी है शोर ! चलने वाली नहीं अब उनकी हमारी जोड़ी पर कोई जोर ! 


उत्सर्ग कर दी जिंदगी उसके नाम ,जबतक जीयेंगें संग ही जीयेंगें ।

चाहे टूटी झोपड़ी , सूखी रोटी खाकर जीवन बितायें ।

मगर हम किसी का धौंस न सहेंगें। दिखावे कि कोई शौक नहीं हमारे पास ।

परहित में ही जिंदगी संग मिलकर हम समर्पण करेंगें । 

कह लेने दो उन्हें हमारे बारे में ,जो कहना है वो कहेंगें ??

हम अपना वक्त क्यों जाया करें ये सोचने में कि लोग हमें क्या कहेंगें ???


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