लोग क्या कहेंगें ???
लोग क्या कहेंगें ???
कर ली मैंने प्रेम किसी से ! संग जीवन जीना चाहा साथ उसी के साथ, उसी से ।
हमसफ़र बन साथ उसका निभाना है। सपना वो तो है ही मेरी !
हकीकत भी उसे ही बनानी है। पर एक प्रश्न कानों में गूँजती !
निराशा के क्षणों को झकझोलती ! कि लोग क्या कहेंगे ?
पर चिंता हमें लोगों की नहीं ! जो कहना है ,कह लेने दो !
वो अपनी जगह हैं ,हम भी अपनी जगह !
हमें अपनी - अपनी जगह रह लेने दो ! जो कहना है ,कह लेने दो ।
आखिर कब तक हम लोगों के हुक्म ही सुनेंगे ।
जिसे पसंद किया है ,साथी ! हम तो उन्हें ही चुनेंगे ।
साथ जिंदगी उन्हें थोड़ी है बितानी ! कि जिस खूँटे बाँध दिये हम बन जाये उसकी निशानी ।
जिसे मैंने अपना बनाया ,उसे ही मंगलसूत्र पहनाना है ।
माँग में सिंदूर भर सात जन्म क्या! आने वाले हर जन्म में अपनी दुल्हन उसे ही बनाना है ।
हम कायर थोड़े ही हैं !कि किसी के आँख दिखाने से दूबक जायेंगें !
साथ मिलकर हम मुकाबला करेंगें एक- दूजे के वास्ते ।
हमलोगों चलेंगे हाथों में डाल हाथ एक ही रास्ते ।
कह लेने दो ,जो कहना उन्हें । यदि हम ये कहने लगेगें कि लोग क्या कहेंगे ?
तो फिर लोगों के पास कहने के लिए क्या बचेगा ?? जो कहना है ,कह लेने दो उन्हें ।
लोग मुझे चाहे घमण्डी कहें ! या कहें इज्जतखोर! पर मुझे इसकी कोई परवाह नहीं !
मचा लेने दो उन्हें, जितनी मचानी है शोर ! चलने वाली नहीं अब उनकी हमारी जोड़ी पर कोई जोर !
उत्सर्ग कर दी जिंदगी उसके नाम ,जबतक जीयेंगें संग ही जीयेंगें ।
चाहे टूटी झोपड़ी , सूखी रोटी खाकर जीवन बितायें ।
मगर हम किसी का धौंस न सहेंगें। दिखावे कि कोई शौक नहीं हमारे पास ।
परहित में ही जिंदगी संग मिलकर हम समर्पण करेंगें ।
कह लेने दो उन्हें हमारे बारे में ,जो कहना है वो कहेंगें ??
हम अपना वक्त क्यों जाया करें ये सोचने में कि लोग हमें क्या कहेंगें ???

