STORYMIRROR

Bhavna Thaker

Romance

4  

Bhavna Thaker

Romance

लिपटी हूँ तुमसे

लिपटी हूँ तुमसे

1 min
79

गर तुम्हारा हृदय नदी है तो मैं लहरों की धार बन लिपटी हूँ तुमसे क्यूँकि

मेरे सुकून की हकीकत है तुम्हारा साथ मेरी रूह को शांति प्रदान करता है तुम संग बहना.!


गर तुम्हारी हंसी बारिश की बूंदों का संगीत है तो उसमें नहाते अपने हर संकट को बहा दूँगी तुम्हारे वजूद से बहती रोशनी मेरी किस्मत जो ठहरी.!

गर तुम्हारा प्यार गुफ़्तगु है तो मुझे कभी बिछड़ने का डर नहीं होगा अपने हर अंदाज़ की गिरह से मुझे बाँधकर रखेगा.!


गर तुम्हारी रूह एक कहानी है तब मुझ तक तुम्हारी सारी शुभकामनाएं दौड़ती चली आएगी

हर बार एक नई शुरुआत कहते जिसका कोई अंत ना हो.!


तुम्हारा मन लक्ष्य है तब मैं राह हूँ, मंज़िल हूँ, हमसफ़र हूँ क्या हाथ थामोगे मेरा उम्मीद जो है तुमसे,

पर तुम्हारा धैर्य मुझे ललचाता है तब मैं रुक जाती हूँ तुम्हें थामने कड़ी बनकर.!


पर अगर मैं कभी अंधी बन जाऊं तब ये सारी क्रिडाएँ तुम्हारी आँखों से देखना चाहूँगी

करना चाहूँगी ये शिद्दत तुम्हारे रूह में बसी मेरे लिए.!


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Romance