अनूप सिंह चौहान ( बब्बन )
Tragedy
भाग रहा पैसे के पीछे
मानव का समाज,
बुद्धि पीछे छोड़ चुका है
पृथ्वी का सम्राट।
कहते हैं भगवन तुने
मानव को दिया है ज्ञान,
फिर ये क्यूँ करता कारज
ज्यूँ बालक अंजान।
अपनी मृत्यु स्वयं है लाता
लालच में फंस विद्वान।
वीर की विनय
काली रात
महफ़िल
कलाम
उसका जाना
कृषक
विद्यारम्भ
साथ
जिद
कठिन पर कठिन है जीवन स्वार्थ छल का प्रतिकार करना I कठिन पर कठिन है जीवन स्वार्थ छल का प्रतिकार करना I
पाप की कमाई से कैसे अपने अपनों के लिए कैसे खुशियां तुम ला पाओगे। पाप की कमाई से कैसे अपने अपनों के लिए कैसे खुशियां तुम ला पाओगे।
जख्म गहरे हैं वादों के सिसकियों से नाता साँसों का जख्म गहरे हैं वादों के सिसकियों से नाता साँसों का
ज़वाब ए देखते भेजते है क्या आज़म गुलाब ए इश्क़ ख़त रस भरा ज़रा भेजा। ज़वाब ए देखते भेजते है क्या आज़म गुलाब ए इश्क़ ख़त रस भरा ज़रा भेजा।
आस कहीं कोई और नहीं कहाँ जाकर फ़रियाद करें हम ईश की चौखट बंद पड़ी। आस कहीं कोई और नहीं कहाँ जाकर फ़रियाद करें हम ईश की चौखट बंद पड़ी।
व्यर्थ ही खुद को ना भटका इस धन का मोह निरर्थक है। व्यर्थ ही खुद को ना भटका इस धन का मोह निरर्थक है।
बंद हो गये है,आज वो दरवाजे जिनसे आती थी,कभी आवाजे! बंद हो गये है,आज वो दरवाजे जिनसे आती थी,कभी आवाजे!
खोकर सबकुछ शायद एक दिन सच को तू जीत पाएगा। खोकर सबकुछ शायद एक दिन सच को तू जीत पाएगा।
शायद वो पलट आए कभी और ये कहे देखो ' प्रभात ' मैं लौट आयी आखिर तेरे लिए। शायद वो पलट आए कभी और ये कहे देखो ' प्रभात ' मैं लौट आयी आखिर तेरे लिए।
फिर वापस आई है, वो मेंहदी वाले हाथ। फिर वापस आई है, वो मेंहदी वाले हाथ।
तुझको भी तो वे छोड़े नहीं कठपुतली तो वो खुद बने औऱ किसीको भी बख्से नहीं ! तुझको भी तो वे छोड़े नहीं कठपुतली तो वो खुद बने औऱ किसीको भी बख्से नहीं !
मन ही मन कोसा खुद को फिर खुद पर ही मुस्कुराई बोली क्यो मांझी संग प्रीत लगाई। मन ही मन कोसा खुद को फिर खुद पर ही मुस्कुराई बोली क्यो मांझी संग प्रीत लग...
एक रोज की दास्तां बने, गिले शिकवे और हंसे, एक रोज की दास्तां बने, गिले शिकवे और हंसे,
सूख गये आज सातों समंदर हैं कैसा छाया झूठ,फ़रेब मंजर है सूख गये आज सातों समंदर हैं कैसा छाया झूठ,फ़रेब मंजर है
टूटे हुए कांच के भाँति ज़मीन पर बिखरे पड़े हैं। टूटे हुए कांच के भाँति ज़मीन पर बिखरे पड़े हैं।
दौड़ा दौड़ा भागा भागा सा, वक़्त के पीछे मारा मारा सा। दौड़ा दौड़ा भागा भागा सा, वक़्त के पीछे मारा मारा सा।
कुछ लम्हों की बात थी, जो गमों में बदल गई। कुछ लम्हों की बात थी, जो गमों में बदल गई।
वो मां ही जाने दर्द इसका जिसकी गोद थी सूनी हो गई! वो मां ही जाने दर्द इसका जिसकी गोद थी सूनी हो गई!
और जिंदगी को परोपकार से बिता रहा है। और जिंदगी को परोपकार से बिता रहा है।