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रिपुदमन झा "पिनाकी"

Tragedy

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रिपुदमन झा "पिनाकी"

Tragedy

क्यों है?

क्यों है?

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गुनाह करके भी बच जाता गुनहगार क्यों है

न्याय भारत का इतना भी लाचार क्यों है।


क्यों नहीं दोषियों को मौत की सज़ा मिलती

ये अदालत भला ख़ुद ही से आज़ार क्यों है।


सिसक रही है रूह आजतक बिचारी की

बेख़बर इससे अदालत की हर दीवार क्यों है।


वो कम उम्र था तो क्यों भला गुनाह किया

निर्भया को ही सज़ा का अधिकार क्यों है।


उस बिचारी को भी तो हक़ था यहां जीने का

ज़िन्दगी पर गुनहगारों का इख़्तियार क्यों है।


गुनाह करते हुए डर तो इसको होगा नहीं

सज़ा के नाम से डर इसको बेशुमार क्यों है।


हो गया फ़ैसला तो क्यों नहीं लटका देते

सज़ा - ए- मौत पर हुज़ूर इंतज़ार क्यों है।


लगी है टूटने अब उम्मीद भी बेबस माँ की

छूटती हाथ से अब आस की पतवार क्यों है।


दिन महीनों में ढले साल बन गए महीने

ख़ाली हाथों में सिर्फ तारीख़-ए-वार क्यों है।



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