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Rajni Sharma

Tragedy

3  

Rajni Sharma

Tragedy

क्या यही प्यार है

क्या यही प्यार है

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कोई नहीं है अपना 

इस मुकम्मल ज़माने में 

कुछ ने दर्द दिया 

तो किसी ने बदनाम किया


ईद्दत और इनायत के 

फर्क को कौन समझा है 

जब पड़ी ज़रूरत खुद को 

तो कभी राम य़ा कभी रहीम

के नाम पर लुटा है


बचपन के खिलौनों में 

एक चाँद भी शामिल था 

कहाँ पता था उसको 

कि चेहरा बनकर रोयेगा

जिस दिन हमारे दर्मियां 


शब्दकोश कम पड़ जायें 

उस वक़्त समझ लेना 

अब हम तुमको नहीं चाहते

क्या यही प्यार है 


जहां मंजिल तक न पहुँच पायी 

आशा थी सूरज सा फैले सम्बंध ये तेरा 

पर अफसोस कोई किरण तक

नज़र न आयी।


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