क्या कल्कि लेंगे अवतार
क्या कल्कि लेंगे अवतार
मन में मेरे प्रश्न हजार
क्या कल्कि लेंगे अवतार?
पाप धरा पर कम तो नहीं है
फिर किस बात का प्रभु इन्तजार?
क्या कल्कि लेंगे अवतार?
मानवता का घट भी रीता
संस्कारों का युग है बीता
घर घर में गृह युद्ध छिड़ा है
नयी महाभारत का इन्तजार?
क्या कल्कि लेंगे अवतार?
सज्जनता कहीं है खोयी
दया भी चादर ओढ़ के सोई
दुष्टों की यहाँ कमी नहीं है
निर्मम हो गया यह संसार
क्या कल्कि लेंगे अवतार?
बोझ धरा पर पहले से भारी
उसपर कोरोना की ये बीमारी
यह भी क्या दानव से कम है?
क्यों नहीं देते इसको मार
क्या कल्कि लेंगे अवतार?
युगों युगों से सुनते आये
पाप बढ़े तब तब प्रभु आये
अभी कितना हम और सहेंगे ?
अब तो दिखा दो रूप साकार
हाँ प्रभु अब ले लो अवतार।
