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Dr. Tulika Das

Classics

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Dr. Tulika Das

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कविता

कविता

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मन का पहला भाव है कविता

संकोच मन को जब बांधे

बंधन मन के खोलती है कविता।

उठती गिरती तरंगे मन में

तरंगों संग बहती है कविता।

एक मन से दूजे मन का सफर है कविता।


व्यथा हो या अनकही कथा हो

शब्द देती है कविता।

अनसुने गीत को स्वर देती है कविता।

स्वर और एहसास का मेल है कविता।


पूरे हो या अधूरे हो

स्वप्न संग लाती है कविता।

सोई हुई इच्छाओं को जगाती है कविता।

उन्मुक्त इच्छाओं का आकाश है कविता।


थकी हुई हिम्मत को संभालती है कविता

पड़े जो जरुरत, जूनून का हाथ थामती है कविता।

साहस और शौर्य संग लाती है कविता‌ ,

हर हालात में ढल जाती है कविता।


हां कवि की वीणा है कविता

अस्तित्व कवि का है कविता

कोई जो मुझसे पूछे

मेरे वजूद का हिस्सा है कविता।


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