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Bhagirath Parihar

Abstract

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Bhagirath Parihar

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कविता में विचार

कविता में विचार

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कविता में विचार की क्या जरूरत है !

आह! और वाह! वाह! है कविता

ऋतुराज बसंत के बयार सी

तपती देह पर बारिश के फुहारों सी

ऋतुओं के श्रृंगारिक वर्णन सी

स्त्री के नख-शिख सौन्दर्य के बखान सी

नहीं तो, प्रार्थना में उतरती है कविता

सौन्दर्य बोध से भर जाये हृदय

तो जन्म लेती है कविता

कविता को विचार की जरूरत कहाँ है ?


हाँ, विचार को कविता की जरूरत हो सकती है

कविता में चारण बोलता है/ आत्मा नहीं बोलती

बोलेगी कैसे?

सोने के सुरक्षित पिंजरे में नजर बंद है

कविता


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