कविता में विचार
कविता में विचार
कविता में विचार की क्या जरूरत है !
आह! और वाह! वाह! है कविता
ऋतुराज बसंत के बयार सी
तपती देह पर बारिश के फुहारों सी
ऋतुओं के श्रृंगारिक वर्णन सी
स्त्री के नख-शिख सौन्दर्य के बखान सी
नहीं तो, प्रार्थना में उतरती है कविता
सौन्दर्य बोध से भर जाये हृदय
तो जन्म लेती है कविता
कविता को विचार की जरूरत कहाँ है ?
हाँ, विचार को कविता की जरूरत हो सकती है
कविता में चारण बोलता है/ आत्मा नहीं बोलती
बोलेगी कैसे?
सोने के सुरक्षित पिंजरे में नजर बंद है
कविता
