Bhoop Singh Bharti
Horror Tragedy
वर्ण व्यवस्था नै करी, माटी मळयामेट।
आकै म्हारे भीम नै, मेटी सभ अळसेट।
मेटी सभ अळसेट, भेद की भीत गिराई।
ऊँच-नीच की मूल, मनुस्मृति भीम जलाई।
लिख नया संविधान, बदल दी दीन अवस्था।
मानव करे समान, तोड़कै वर्ण व्यवस्था।
झूमता बसंत है
कुंडलिया : "म...
कुंडलिया
कुंडलिया : "प...
हाइकु : नव वर...
रैड क्रॉस
गीत
लेकिन खूनी मोड़, बली लेने से, बाज न आया। लेकिन खूनी मोड़, बली लेने से, बाज न आया।
चौंक पड़ती है हर वक्त ये नज़र ही, ज़रा सी भी आहट कानों में आए जो। चौंक पड़ती है हर वक्त ये नज़र ही, ज़रा सी भी आहट कानों में आए जो।
क्या हुआ आपको, क्या हुआ आपको फेकू जी, फेकू जी क्या हुआ आप को क्या हुआ आपको, क्या हुआ आपको फेकू जी, फेकू जी क्या हुआ आप को
कि अचानक टूट जाती है नींद लेकिन नहीं होते ओझल वो खौफ़नाक मंज़र... कि अचानक टूट जाती है नींद लेकिन नहीं होते ओझल वो खौफ़नाक मंज़र...
विश्व में यह क्रांति हो, नारी सुरक्षा और शांति हो ! विश्व में यह क्रांति हो, नारी सुरक्षा और शांति हो !
जिंदगी वैसे तो , किसी न किसी तरीक़े से, हर रोज डराती है। जिंदगी वैसे तो , किसी न किसी तरीक़े से, हर रोज डराती है।
अपूर्व सा वशीकरण होता है... मृत्यु का एक अलग आकर्षण होता है ! अपूर्व सा वशीकरण होता है... मृत्यु का एक अलग आकर्षण होता है !
दिल में आती है मुस्करातीं है... ये बेटियां बहुत सताती है. दिल में आती है मुस्करातीं है... ये बेटियां बहुत सताती है.
सबकी पिटाई कर थाने ले जाया गया इस तरह भूतिया हवेली का रहस्य समाप्त हुआ। सबकी पिटाई कर थाने ले जाया गया इस तरह भूतिया हवेली का रहस्य समाप्त हुआ।
कविता लिखी तो लगा दिल में बचा है कोई पढ़ेगा तो शायद उतरे ये बुखार। कविता लिखी तो लगा दिल में बचा है कोई पढ़ेगा तो शायद उतरे ये बुखार।
कहानी जहाँ इंसानियत शर्म सार होती हमेशा के लिए जहाँ। कहानी जहाँ इंसानियत शर्म सार होती हमेशा के लिए जहाँ।
खड़े थे पतिदेव सामने, फिर क्या था…… भागी सिर पर रख पैर डरावनी रात। खड़े थे पतिदेव सामने, फिर क्या था…… भागी सिर पर रख पैर डरावनी रात।
राम लीला की आखिरी रात थी, ठंड का महीना था,गर्म कपड़े बदन पर। राम लीला की आखिरी रात थी, ठंड का महीना था,गर्म कपड़े बदन पर।
एक डर और अजीव रोमांच में, मैं भी अपने घर आ सो गया। एक डर और अजीव रोमांच में, मैं भी अपने घर आ सो गया।
लेकिन याद रखना.... गया अगर अंधेरे में तो छोड़ कर तुझे चली जाऊँगी। लेकिन याद रखना.... गया अगर अंधेरे में तो छोड़ कर तुझे चली जाऊँगी।
की जब है हनुमान जी का आशीष, तब फिर काहें का हॉरर। की जब है हनुमान जी का आशीष, तब फिर काहें का हॉरर।
और समाज की गंदगी के संपर्क में लाता है मद्यपान, व्यभिचार और मांसाहार जुए के साथी हैं। और समाज की गंदगी के संपर्क में लाता है मद्यपान, व्यभिचार और मांसाहार जुए क...
सिर्फ मैं और मेरा मोती, हम दोनो हर रोज इसी राह से गुजरते हैं। सिर्फ मैं और मेरा मोती, हम दोनो हर रोज इसी राह से गुजरते हैं।
ऐसा जब होता है तो यह काफी डरावना होता है। ऐसा जब होता है तो यह काफी डरावना होता है।
एहतियात रखना की अभी है मजबूरी दो ग़ज़ की दूरी और मास्क है ज़रूरी। एहतियात रखना की अभी है मजबूरी दो ग़ज़ की दूरी और मास्क है ज़रूरी।