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dr vandna Sharma

Drama Tragedy

5.0  

dr vandna Sharma

Drama Tragedy

कटु लेकिन सत्य है

कटु लेकिन सत्य है

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बेटियाँ समझी जाती हैं आज भी पराई

आज शिक्षित होने का दम्भ भरता है समाज

नहीं है सुरक्षित फिर भी नारी का सम्मान।


सच्चाई क्यों मुँह छुपाकर रोती है

झूठ की ही क्यों हर जगह पूजा होती है

पड़ोसी को पीड़ा हो रही बहुत

उसकी थाली में मुझसे ज़्यादा रोटी है।


कटु, लेकिन सत्य है

रो रही मानवता, छल फरेब हँस रहा है

क्या कीमत रह गयी ईमान की

सोच इतनी तुच्छ हो गयी इंसान की।


काटते हैं अपनी जड़ें, बनते हैं बड़े-बड़े

हो रही जय यहाँ बेईमान की

लेकिन गुलाब काँटों में ही खिलते हैं

दर्द अपनों से ही मिलते हैं।


सफलता उन्हीं को मिलती है

विश्वास की डगर पर

जो मुस्कराकर चलते हैं।।


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