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Dr vandna Sharma

Romance


4.0  

Dr vandna Sharma

Romance


क्या चलोगे साथ मेरे ?

क्या चलोगे साथ मेरे ?

1 min 177 1 min 177

सुनो !

क्या चलोगे साथ मेरे ?

कहीं दूर हसीं वादियों में 

जहाँ चहूँ ओर हो हरियाली 

दूर तलक फैला नील गगन हो 

कल -कल बहता झरना हो 

चिड़ियों का मीठा कलरव हो 

ठंडी -ठंडी मस्त पवन हो 

हाथों में हाथ तुम्हारा हो 

पास एक नदी का किनारा हो 

अनजान राहें हो और दूर हो मंजिल 

चलें हम -तुम चहकते हुए 

गूंजता मधुर स्वर हमारा हो 

कट जायेगा सफर यूं ही 

बस साथ तुम्हारा हो 

सुनो ! 

चलोगे न.. 


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