STORYMIRROR

Dr vandna Sharma

Abstract

4  

Dr vandna Sharma

Abstract

आओ हम सब पेड़ लगाएं

आओ हम सब पेड़ लगाएं

1 min
59

आओ सुनाऊं तुम्हें एक कहानी 

ना कोई राजा ना कोई रानी 


जा रहा था एक पथिक अपनी ही धुन में 

ख्वाबों को बनता हुआ मन ही मन में 


सूरज लगा तेज चमकने राही छाया लगा

ढूंढने चारों तरफ नजर दौड़ाई 


दूर दर तक थी ना कोई परछाई 

प्यास से गला सूख रहा था 


साहस पीछे छूट रहा था 

शायद कहीं कुछ ढूंढ रहा था 


ठंडी छाया के लिए तड़प रहा था 

सोच रहा था मन ये उसका दे दे


कोई पानी का छपका  यहां कोई पेड़

होता मौसम कुछ और होता होती


चारों तरफ हरियाली झूम उठती डाली डाली 

आओ हम सब पेड़ लगाएं धरती को

आने वाले संकट से बचाएं।


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Abstract