कर्मों की ज़मापूंजी
कर्मों की ज़मापूंजी
जी तोड़कर दिन - रात मेहनत करके ,
मेहनतकश इंसान सदा चलते हैं तनके !
उन्हें पता है कि व्यर्थ नहीं करना समय ,
कुछ नहीं हासिल होगा अकर्मण्य बनके!
एक बेहद परिश्रमी इंसान का पसीना :
जैसे बूंदो की शक्ल में कोई नगीना !
जो परिश्रम से नहीं सीखते कभी हारना :
वही जानते सफलता का परचम लहराना!
जो अनवरत परिश्रम और संघर्ष का ,
असल महत्त्व और मोल जान जाते हैं !
अपने कर्मों की जमापूंजी संग्रह करके ,
अपने लिए मील का पत्थर बन जाते हैं !
