STORYMIRROR

Lata Sharma (सखी)

Romance

4  

Lata Sharma (सखी)

Romance

कर दो न

कर दो न

1 min
17

हाथ थामकर मेरा सफर आसान कर दो ना,
प्यार के फूलों से जिंदगी बागान कर दो ना।

तन्हा सी होने लगी हूँ फिर से मैं जान मेरी
मुस्कुराहट देकर गमी बयाबान कर दो ना।

सेहरा की धूप पहले भी उदास करती थी,
अपने साथ से ठंडी छांव समान कर दो ना। 

डर लगता है कहीं गुम न हो जाऊँ मैं खुदमें,
कहके प्यार है मेरी हंसी दास्तान कर दो ना।

मै नहीं बन सकती महान ये अच्छे से पता है,
शैतान न बन जाऊँ, मुझे इंसान कर दो ना। 

उम्मीद की डोर जिंदगी की तुझ संग बंधी है,
मैं जलती मसान सी मुझे जन्मस्थान कर दो ना।

’सखी’ जी लेगी तुझमें तुझ बनकर खुशी से, 
मेरी रूह चुराकर मेरा इश्क महान कर दो ना। 

©सखी


Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Romance