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Dinesh Dubey

Abstract

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Dinesh Dubey

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कॉलेज के दिन

कॉलेज के दिन

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खूब होती मस्ती सभी होते मस्त 

बड़े सुहाने थे वो कॉलेज के दिन

नई उमंग थी हम भी दबंग थे 


यारो की संगत परियों की चाहत

हर कोई उड़ता था सपनो में 

बड़े ही मौज में रहते थे अपनो में

पढ़ने का टेंशन पास होने का टेंशन 


फिर भी हमेशा फ्रेश रहते थे सब जन

काश लौट पाते हम फिर उस बचपन

अपनी हुई गलतियों को सुधार पाते 


अब समझ आता है ,उसकी अहमियत 

जो भी हो कॉलेज के दिन थे 

बड़े ही सुहाने दिन।


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