STORYMIRROR

Alka Ranjan

Tragedy Inspirational

4  

Alka Ranjan

Tragedy Inspirational

कन्या : सृष्टि की जान

कन्या : सृष्टि की जान

2 mins
389

मां ! मां !

कहते इक रोज मैंने सुना, 

अवाक होकर तब देखा इधर-उधर ,

पाकर किसी को भी न पास 

देखा अपने भीतर तब 

जैसे कुछ कह रही हो मुझसे

 मेरे भीतर पल रही नन्ही सी जान..

 मां! मां! मैं हूं, तेरी बेटी मां

 पूछूं तुझसे इक सवाल मैं मां

 क्यों तुम सब तकती हो रहा बेटे का 

जाने या अनजाने पर मैं तो हूं एक बेटी मां

 मैं हूं तेरा ही अंश, लेकर आऊंगी तेरा ही रूप मैं मां 

तू जो दे इक मौका मां

बेटे से कम न कभी पाओगी मुझको मां,

 हंसती हंसाती बन जाऊंगी तेरी खुशी मैं मां,

 झूमती गुनगुनाती कभी बन जाऊंगी परी मैं मां,

 प्यार बांटती बन जाऊंगी तेरे हर पल की सखी मैं मां,

सपने तेरे जो अधूरे हैं, उसे पूरा कर जाऊंगी मैं मां

 भर कर उड़ान एक दिन

 बन जाऊंगी अभिनेत्री या फिर ड्रेस डिजाइनर 

तू जो दे उच्च शिक्षा गर

बन जाऊंगी डॉक्टर या इंजीनियर मैं मां

 मानवता के लिए जिऊंगी

 समाज कल्याण होगा ध्येय मेरा मां

चिरूंगी नहीं किसी के कपड़े, ना हृदय मैं मां 

बेटा नहीं बेटी हूं मैं मां 

सम्मान देना जानूँ मैं मां,

स्त्री हूं पर अबला नहीं मैं मां

देश-समाज द्रोहियों से डटकर करूंगी सामना मैं मां

बन जाऊंगी क्रांति की आवाज मैं,

शक्ति का स्रोत हूं मैं मां,

बेटी हूं पर पराया धन मुझको तू समझना न कभी मां 

भला जड़ से कभी जुदा हुई कोई डाली है मां 

होगी रीत यही पर मन प्राण से 

पाओगी मुझको तुम अपना ही मां 

फिर किसी रोज इसी परंपरा को दूंगी जन्म मैं भी मां 

आओ न, बता दें इस जग को

कन्या भ्रूण हत्या है पाप 

क्योंकि कन्या ही है सृष्टि की जान !


Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Tragedy