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JAYANTA TOPADAR

Tragedy Others

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JAYANTA TOPADAR

Tragedy Others

कंजूसी का दुष्परिणाम..

कंजूसी का दुष्परिणाम..

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कंजूसी की हद हो गई...!!!


न खुद परिमित मात्रा में 

अन्नादि करते हैं,

न तो किसी अतिथि को 

परिमित अन्नादि परोसते हैं --

वो कैसे मेज़बान हैं, 

जो अपनी हैसियत से कम की 

मेज़बानी किया करते हैं...!


न जाने कहाँ-कहाँ 

रुपये जमा रखते हैं,

जो वक्त पड़ने पर भी 

खर्च नहीं करते --

वो कैसे कंजूस लोग हैं, 

जो अपनी दौलत का 

अंबार लगाकर बस अपना 

अमन-चैन खो दिया करते हैं...!


ऐसी स्थिति में क्यों आते हैं

कुछ कंजूस लोग...

अपने पास सबकुछ होते हुए भी

मुफलिस-सा नज़र आते हैं ?

निस्संदेह ये उनके 

स्वभाव का दोष है,

जो कि उनकी 

विवेक-बुद्धि का

सर्वनाश कर देते हैं...।


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