कमली
कमली
तेरे इश्क़ ने मैनू
कमली करता
बिन जोग धार्या ही
मैनू जोगन करता
उसे इश्क़ ने तैनू राँझा
ते मैनू हीर बनाया
बिना लभे ही
मैनू पीर ध्याया
उसे इश्क़ ने मैनू
उस रूह नाल मिलाया
मैं सोहणी बन गई
तू महिवाल कहाया
हर इक रोज़
सिख्या पाठ सबर दा
सिर्फ तू ही याद मैनू
मैनू आपनी खबर न
रोज़ दिन बीतदा
तेरी याद च
सिर्फ तेरा ही ज़िकर हुँदा
मेरी हर बात च
बिन जोग धार्या ही
मैनू जोगन करता
तेरे इश्क़ ने मैनू
कमली करता!

