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V. Aaradhyaa

Romance Classics Fantasy

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V. Aaradhyaa

Romance Classics Fantasy

कलकल बहती चंचला हूँ

कलकल बहती चंचला हूँ

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मुझसे ज़रा अदब से पेश आया कीजिये ,

मेरा भी एक वज़ूद है,आप सब मान जाइए !

अपने धुन में आगे बढ़ती कलकल,चंचला हूँ,

अब अपना परिचय भी दे दूँ,मैं एक महिला हूँ !


सुनो मेरे प्यारे दोस्तों, सुनो मेरी सखियों,

 मैं ना ऐसी वैसी हूँ ना कोई इतनी महान हूं !

 हां मैं एक सशक्त गौरवशाली अभिमान हूं,

सब से मांगती अपने अस्तित्व का सम्मान हूं !


महिला दिवस मनाने की बड़ी खास बात है

सबके मन में जागी अब तो एक नई आस है !

डियर सखियों समझा करो हमारे ज़ज़्बात

 इस दिन स्त्रियों की होती खुद से मुलाक़ात !


जीवन के सफ़र में कई बार होता है फसाद

हर बार सबके हित में करता कोई हिफाज़त !

सीधी डगर से जब छीन लेता कोई आसमान,

अक्सर मंजिल के पास आकर थकता इंसान !


अपने प्यारे बाबा की प्यारी सी गुड़िया हूं मैं,

 बहनों की शान हूँ और भैया का अभिमान हूं !

 पता है, मेरी भोली भाली मैया तो कहती है कि;

 मैं उनकी लाडली हूँ और मैं तो उनकी जान हूं !


ज्यों ज्यों महिलाओं की उम्र बढ़ती जाती है ,

उनके पास तो जमा होती अनुभव की थाती है !

बढ़ती हुई उम्र कभी ऐसे थम ही नहीं सकती,

उम्रदराज़ हो या कमसिन सभी सम्मान पाती है !


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