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कल्पना रामानी

Classics


5.0  

कल्पना रामानी

Classics


कितना हसीन है

कितना हसीन है

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बरसात का ये मौसम, कितना हसीन है !

धरती गगन का संगम, कितना हसीन है !


जाती नज़र जहाँ तक, बौछार की बहार

बूँदों का नृत्य छम-छम, कितना हसीन है !


बच्चों के हाथ में हैं, कागज़ की किश्तियाँ

फिर भीगने का ये क्रम, कितना हसीन है !


विहगों की रागिनी है, कोयल की कूक भी

उपवन का रूप अनुपम, कितना हसीन है !


झूलों पे पींग भरतीं, इठलातीं तरुणियाँ

सावन सुनाता सरगम, कितना हसीन है !


मित्रों का साथ हो तो, आनंद दो गुना

यह गुनगुनाता आलम, कितना हसीन है !


हर मन का मैल मेटे, सुखदाई मानसून

हर मन का नेक हमदम, कितना हसीन है !


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