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Shubham Rawat

Abstract

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Shubham Rawat

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किसे पता

किसे पता

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आज का दिन कुछ उदास है 

आने वाला कल किसने देखा

आज सफर में अकेले हो

कल किसका साथ मिल जाये

कल किसका हाथ छूट जाये 

किसे पता


कोई पुरानी बातों से आज तक नाराज है 

कोई दुश्मनों को भी पानी पिला रहा है 

हम ऐसे इंसान बन गये हैं 

दूसरे की खुशी से नाराज है


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