ख़्वाब
ख़्वाब
मेरे ख़्वाबगाह की जम़ीन महक रही थी
एक पहचानी खुशबू से,
उसने हीरे की तरह दर्द पहन रखा था
दो कोहिनूर पलकों पर बूँद बनकर ठहरे थे
बाकि छोटे-छोटे चमकते उसको कचोट रहे थे..!
आज रात मैंने उसे मेरे सपने में देखा
मेरे लिए काफ़ी है,
कम से कम मैंने उसे महसूस तो किया..!
जब आप किसीको रूह की गहराई से चाहते हो
तब सपने में भी अपनी आगोश में उसके तन की तपिश को महसूस करते हो
मेरे आस-पास उसकी बाँहों की जंजीर ने एक वितान बनाया था..!
अपने बिस्तर की मखमली चद्दर की सतह पर एक उष्मा की परत बिछ गई
मेरा दिल तालियाँ बजा रहा था मेरे स्पंदनों की सिसकियों संग..!
मेरी रूह साँसे ले रही थी बरसों बाद,
मैं सुबह उठा मैंने चुंबन लिया मेरे सपने को गुडबाय कहते हुए,
ये दर्दीले हीरे की ख़लिश चुभेगी जब तक मैं आख़री बार सोने के लिए आँखें बंद नहीं करूँगा।।

