STORYMIRROR

डॉ० कुलवीर बैनीवाल

Tragedy Inspirational Thriller

3  

डॉ० कुलवीर बैनीवाल

Tragedy Inspirational Thriller

खुद से ही जीतने की कोशिश कर जिद्द बना ले तू

खुद से ही जीतने की कोशिश कर जिद्द बना ले तू

1 min
215


खुद से ही जीतने की कोशिश कर जिद्द बना ले तू ,

हर मुसीबत से डटकर लड़ना सीख ले तू ,

रोक रही है आगे बढ़ने से तुझको जो ,

तोड़ दे उन पैरों की हर बेड़ियाँ तू।।

खुद से ही जीतने की कोशिश कर जिद्द बना ले तू ,


मुश्किल है मगर नामुमकिन नहीं, 

दिखा दे उन आँधियों को टूटी हुई बेड़ियाँ,

बता दे उनको, जो दे रहे चुनौतियाँ तुझको, 

जता दे उनको, हार मानूंगा नहीं,

धिक्कार रहे थे जो, तेरे जमीर को,

दिखा दे जीतने की कला को तू,

खुद से ही जीतने की कोशिश कर जिद्द बना ले तू।। 


उदास मत हो, तू किसी से छोटा नहीं है,

वो कर सकता है तू, जो किसी ने सोचा नहीं है,

कह रहा है "कुलवीर बैनीवाल" तुझको,

दुनिया की औकात नहीं है उड़ने से रोके जो तुझको,

बंदी(कैद) है अपने ही नजरिये के पिंजरे में तू ,

खुद से ही जीतने की कोशिश कर जिद्द बना ले तू।।|

 



Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Tragedy