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Rajeshwar Mandal

Romance

4  

Rajeshwar Mandal

Romance

कातिल

कातिल

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न हां में शामिल

न ना में शामिल

न हमसफ़र मेरा

न मझधार का साहिल

न मैं तुझे हासिल

न तू मुझे हासिल

फिर यादों में समाये हो क्यूं

मुमकिन नहीं हमराज समझ कर

बरी कर दूं तुझे मैं

जब दोषी भी तू कातिल भी तू


तू तमाम उम्र देकर भी

मिल जाए तो खुश हूँ मैं

तेरा इक लम्हा भी जी लूँ

तो खुश हूं मैं

माना कि मुस्तकबिल नहीं

तेरे संग इश्क का

फिर आते हो क्यूं यादों में तू

मेरे ख्वाबों में तू


मेरे जीने का वजह तू

मेरे मरने का सबब तू

मेरे रुठने का वजह तू

मेरे मनाने का सबब तू

मेरे हंसने का वजह तू

मेरे रोने का सबब तू

मेरे सांसों में तू

मेरे रोम रोम में बसा तू

कुछ नहीं है मेरा तू

पर लगता ऐसा है क्यूं

सब कुछ मेरा ही हो तू

कैसे आसानी से भूल जाऊं

इस गुमनाम रिश्ते को

तू ही बता ओ मेरे मिस्टर


बेशक घायल हूं मैं

तेरे ही नयन वाणों से ही

पर देख तेरे तस्वीर की मासूमियत

इस लायक भी न तू

कि तुझे कातिल कह दूं

और न इस काबिल ही प्रिय तू

कि तुझे मैं बरी कर दूं

तुझे दोषमुक्त कह दूं।


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