अच्युतं केशवं
Tragedy
कारखानों में सिसकता
बालपन पिसती जवानी।
और बूढ़े होठ सूखे
मांगते दो घूंट पानी।
झुग्गीयों में जन्म लेकर
झुग्गीयों में मर गये।
जी न पाए एक दिन
मज़दूर अपनी जिंदगानी।
मन आस तारा
सहज तुमने अपन...
कल लुटेरे थे ...
धूम्रपान कर ब...
छिपा हृदय निज...
उर सहयोगी भाव
भट्टी सी धरती...
अलग हो रूप रं...
आला वाले डॉक्...
भारोत्तोलन खे...
हूँ कब से वहीं, उसी मोड़ पर, तुमने छोड़ा था जहां, मुँह मोड़ कर। हूँ कब से वहीं, उसी मोड़ पर, तुमने छोड़ा था जहां, मुँह मोड़ कर।
देख समय ने पलटी खायी, मोबाइल के दर्शन भोर। देख समय ने पलटी खायी, मोबाइल के दर्शन भोर।
हूं गुमसुम मगर गमगीन नहीं अकेली ज़रूर हूं पर तन्हा नहीं। हूं गुमसुम मगर गमगीन नहीं अकेली ज़रूर हूं पर तन्हा नहीं।
जंगल में शव मिलने से बड़ी सनसनी थी लिबरल्स की भौंहें इससे बड़ी तनी तनी सी थी। जंगल में शव मिलने से बड़ी सनसनी थी लिबरल्स की भौंहें इससे बड़ी तनी तनी सी थ...
घर की मुर्गी दाल बराबर समझी जाने वाली औरतें सच में दाल सी आम ही बनी रहने में माहिर है घर की मुर्गी दाल बराबर समझी जाने वाली औरतें सच में दाल सी आम ही बनी रहने में...
हां रोता हूं मैं, क्रोध में कुढ़ता भी हूं बस कह नहीं पाता हूं। हां रोता हूं मैं, क्रोध में कुढ़ता भी हूं बस कह नहीं पाता हूं।
हे ईश्वर तू ही बता दोष जमाने का है या मेरी किस्मत का। हे ईश्वर तू ही बता दोष जमाने का है या मेरी किस्मत का।
और फिर मुझे याद रहा किया बस यही कि, प्रेममय हूँ मैं... मेरी तरह प्रेममय हो तुम भी : और फिर मुझे याद रहा किया बस यही कि, प्रेममय हूँ मैं... मेरी तरह प्रेममय हो तु...
अब तेरे होने न होने से कोई फर्क नहीं पड़ता जिंदगी गुजरनी थी गुजर ही रही है। अब तेरे होने न होने से कोई फर्क नहीं पड़ता जिंदगी गुजरनी थी गुजर ही र...
अपनी जुल्फों को जूड़े में बांध सारी जिम्मेदारी निभाती हूं। अपनी जुल्फों को जूड़े में बांध सारी जिम्मेदारी निभाती हूं।
महात्मा गांधी की आत्मा सिसक रही होगी आज भारत के राजनितिज्ञों ने गढ़ दिया कैसा समाज। महात्मा गांधी की आत्मा सिसक रही होगी आज भारत के राजनितिज्ञों ने गढ़ दिय...
दिल से किसी को आज़ भी हम याद क्या करें। गाफिल हुआ है उससे तो फ़रियाद क्या करें।। दिल से किसी को आज़ भी हम याद क्या करें। गाफिल हुआ है उससे तो फ़रियाद क्या करे...
ओह..! समझ नहीं आता मेरी वेदना अब कम हुई है या और....! ओह..! समझ नहीं आता मेरी वेदना अब कम हुई है या और....!
किस्से सुना रही हूं अपने बचपन के. किस्से सुना रही हूं अपने बचपन के.
भागदौड़ बस भागदौड़, यहाँ भी दौड़,वहाँ भी दौड़। भागदौड़ बस भागदौड़, यहाँ भी दौड़,वहाँ भी दौड़।
अधिक सोच विचार न करो मुझे मां के गर्भ में ही मार दो। अधिक सोच विचार न करो मुझे मां के गर्भ में ही मार दो।
मैं इस छोर से थामे हुए एक आस का धागा, तू उस छोर बैठा रात की चादर में लिपटा मैं इस छोर से थामे हुए एक आस का धागा, तू उस छोर बैठा रात की चादर में लिपटा
जंग अभी तक है जारी , हिम्मत अभी न है हारी । जंग अभी तक है जारी , हिम्मत अभी न है हारी ।
सफर पर निकला पूरा परिवार हमारा साथ थे तो लगा खुशियों की बरसात हो गई। सफर पर निकला पूरा परिवार हमारा साथ थे तो लगा खुशियों की बरसात हो गई।
छेड़ हमने की प्रकृति से, बंधनों में बांध कर ! छेड़ हमने की प्रकृति से, बंधनों में बांध कर !