कारगिल एक विजय
कारगिल एक विजय
आजादी के पश्चात था,
दुश्मनों ने अनय मचाया,
बीसवीं सदी के अन्तिम दशक में ,
ऐसा भी एक दिन आया ,
जब कारगिल भूमि पर दूसरों ने था,
अपना परचम लहराया ,
सन् निन्यानवे की थी ,
मई तीसरी ,
जिस दिन पाक ने अपने नापाक इरदों से ,
कारगिल को हथियाया,
एक फरिश्ता जो था ,
गरङिया बनकर आया,
घुसपैठ की सूचना को था ,
सेना तक पहुँचाया ,
बीत गये थे दो दिन,
पाँच मई का कैसा अशुभ प्रभात था आया ,
उन कायरों ने भारतीय जाबांजों ,
पर किया अचानक हमला था,
पाँच सिंहों को छल से मौत की नींद सुलाया ,
जब नौ मई का प्रभात आया ,
पाक सेना ने गोलाबारी करके था,
चारो तरफ कोहराम मचाया ,
उस दिन उसने गोलाबारी से था ,
भारतीय गोलाबारूद खत्ती का ,
नामो-निशान मिटाया ,
दस मई का दिन जब आया ,
भारतीय सेना ने,
तब द्रास,काकसार,मुश्कोह सेक्टर में,
घुसपैठियों को था पाया,
बीत गये जब सोलह दिन ,
भारतीय हवाई लङाको के पास ,
घुसपैठियो को धूल चटाने का ,
आदेश ऊपर से था आया ,
सत्ताइस मई का सूर्योदय जब आया ,
भारतीय लङाको ने,
अपने 2 विमान मिग 21-29 को था ,
आसमान में उङाया,
उस दिन ,
जाबांज लेफ्टिनेन्ट नचिकेता ,
को था पाकिस्तान ने बन्दी बनाया,
जिन-जिन सेक्टर पर था ,
पाकिस्तानी परचम लहराया ,
वहाँ-वहाँ मिग 29 से था ,
R-77 मिसाइल गया गिराया,
अन्त में ...
सन् निन्यानवे के ,
मास जुलाई के तिथि छब्बीस ,
को वह प्रभात भी आया,
जब कारगिल भूमि पर ,
भारत माँ के वीर सपूतों ने ,
था फिर से अपना परचम लहराया ||
