STORYMIRROR

Ritesh Maurya

Inspirational

4  

Ritesh Maurya

Inspirational

कारगिल एक विजय

कारगिल एक विजय

2 mins
296

आजादी के पश्चात था,

दुश्मनों ने अनय मचाया,

बीसवीं सदी के अन्तिम दशक में ,

ऐसा भी एक दिन आया ,

जब कारगिल भूमि पर दूसरों ने था,

अपना परचम लहराया ,

सन् निन्यानवे की थी ,

मई तीसरी ,

जिस दिन पाक ने अपने नापाक इरदों से ,

कारगिल को हथियाया,

एक फरिश्ता जो था ,

गरङिया बनकर आया,

घुसपैठ की सूचना को था ,

सेना तक पहुँचाया ,

बीत गये थे दो दिन,

पाँच मई का कैसा अशुभ प्रभात था आया ,

उन कायरों ने भारतीय जाबांजों ,

पर किया अचानक हमला था,

पाँच सिंहों को छल से मौत की नींद सुलाया ,

जब नौ मई का प्रभात आया ,

पाक सेना ने गोलाबारी करके था,

चारो तरफ कोहराम मचाया ,

उस दिन उसने गोलाबारी से था ,

भारतीय गोलाबारूद खत्ती का ,

नामो-निशान मिटाया ,

दस मई का दिन जब आया ,

भारतीय सेना ने,

तब द्रास,काकसार,मुश्कोह सेक्टर में,

घुसपैठियों को था पाया,

बीत गये जब सोलह दिन ,

भारतीय हवाई लङाको के पास ,

घुसपैठियो को धूल चटाने का ,

आदेश ऊपर से था आया ,

सत्ताइस मई का सूर्योदय जब आया ,

भारतीय लङाको ने,

अपने 2 विमान मिग 21-29 को था ,

आसमान में उङाया,

उस दिन ,

जाबांज लेफ्टिनेन्ट नचिकेता ,

को था पाकिस्तान ने बन्दी बनाया,

जिन-जिन सेक्टर पर था ,

पाकिस्तानी परचम लहराया ,

वहाँ-वहाँ मिग 29 से था ,

R-77 मिसाइल गया गिराया,

अन्त में ...

सन् निन्यानवे के ,

मास जुलाई के तिथि छब्बीस ,

को वह प्रभात भी आया,

जब कारगिल भूमि पर ,

भारत माँ के वीर सपूतों ने ,

था फिर से अपना परचम लहराया ||



Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Inspirational