STORYMIRROR

SURYAKANT MAJALKAR

Inspirational

3  

SURYAKANT MAJALKAR

Inspirational

हौसला बुलंद है।

हौसला बुलंद है।

1 min
137

हम जिंदा हैं यहाँ

मरा तो केवल जिस्म है।

चाहे जला दो।

चाहे दफना दो।

ये तो केवल रस्म है।


मिटा न सकोगे तुम

हौसले और हिम्मत को।

जिंदा है अब भी हम में

ऐसी रुहानी ताकत को।


दूरियाँ मानी है हमने

दूर नहीं इन्सानियत से।

शहीद हुए वो शेर थे

जो जान सके जीवन को।


इतिहास गवाह सुनो

तुम पे हंसती दुनिया सारी।

ये एक से क्या हारेगी

करो तुम फौज़ की तय्यारी।


Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Inspirational