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SURYAKANT MAJALKAR

Abstract Inspirational Others

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SURYAKANT MAJALKAR

Abstract Inspirational Others

जिंदगी ..अनलिमिटेड

जिंदगी ..अनलिमिटेड

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घरसे निकले तैय्यार होके,
वहीं भीड़ में रास्ता ढुँढते,
पहचान हुई शख्कसने
हाथ दिया वरना आज फिर...

भींड की भी जुबाँ होती है
मगर वो रौंदना जानती है,
इन्सानियत कम होती है
मगर होती है।

सही से बात करो मगर
टेढ़ा होके जगह बनाना
धक्का दे कर उतरना 
हक है..

रोज चलती है, रोज मिलती है,
अपने हिसाब अपने नियमपर
अपन 'रिक्स'पर ट्रेन से..

फिर भी
लेटमार्क्स
ताने
फायरींग...अनलिमिटेड...
चलती है जिंदगी
नींद से नींदतक..
कलसे आजतक
आजसे कलतक...
©सुर्यांश


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