SURYAKANT MAJALKAR
Abstract
तिरे आँखों में आँसू ये किसने गुनाह किया। वो भी पछताए अकेले में खुदको ना माफ़ किया। ©सुर्यांश
तुजसा
हे जीवन !
जिंदगी ..अनलि...
हम
आँसू
गोरी का सपना
सपना
चार दिन की चा...
सलाम दुआ
"स्टोरी मिरर" मंच ने ये, खूबसूरत परिवार बनाया है। "स्टोरी मिरर" मंच ने ये, खूबसूरत परिवार बनाया है।
भावना रहित करताजा रहा इंसान को पैसे का बढ़ता ताप। भावना रहित करताजा रहा इंसान को पैसे का बढ़ता ताप।
सजाएंगे महफ़िल, बिताएंगे हर लम्हा दोस्ती के जाम में। सजाएंगे महफ़िल, बिताएंगे हर लम्हा दोस्ती के जाम में।
रामायण और गीता जिनसे मिला मूल्यवान उपदेश, रामायण और गीता जिनसे मिला मूल्यवान उपदेश,
लेखनी की प्रक्रिया में मन और मस्तिष्क दोनों सक्रिय रहते हैं।। लेखनी की प्रक्रिया में मन और मस्तिष्क दोनों सक्रिय रहते हैं।।
यह दया शब्द है तो छोटा सा, पर विस्तृत है इसकी पहचान, सभी धर्मों को जो एक साथ लाए, है ध यह दया शब्द है तो छोटा सा, पर विस्तृत है इसकी पहचान, सभी धर्मों को जो एक साथ ...
उसी वक़्त रब की मुझ पर रहमत हुई, लगा की ताप सहकर हम निखर जाएंगे। उसी वक़्त रब की मुझ पर रहमत हुई, लगा की ताप सहकर हम निखर जाएंगे।
मिलन की तीव्र भौतिक इच्छा या कभी कभी मृगतृष्णा में मिलन की तीव्र भौतिक इच्छा या कभी कभी मृगतृष्णा में
आकर देखो हर शब्द बोलते हैं किताबों की दुनिया में। आकर देखो हर शब्द बोलते हैं किताबों की दुनिया में।
बस यूं ही एक पिता इंतजार नहीं करता खुद के किसी दिवस का बस यूं ही एक पिता इंतजार नहीं करता खुद के किसी दिवस का
सावन मस्ती, भोलेनाथ की भक्ति में झूम उठा यह संसार, लगी झूलों की कतारें खुशियों का सावन सावन मस्ती, भोलेनाथ की भक्ति में झूम उठा यह संसार, लगी झूलों की कतारें खुशियो...
अपने कितने भी दूर क्यों नहीं होते, अपनापन पहुँच ही जाता दिल तक अपने कितने भी दूर क्यों नहीं होते, अपनापन पहुँच ही जाता दिल तक
भोग विलास में बंधा इंसान कहां कुछ जान पाया है भोग विलास में बंधा इंसान कहां कुछ जान पाया है
जो गिर जाए ऊंचाई से सिर्फ खूबसूरत कहलाने के लिए जो गिर जाए ऊंचाई से सिर्फ खूबसूरत कहलाने के लिए
प्रेम का फिर कष्ट क्यों यह, पर्वतों सा लग रहा है।। प्रेम का फिर कष्ट क्यों यह, पर्वतों सा लग रहा है।।
बिना किनारों के तो कोई धारा सागर में बहता नहीं। बिना किनारों के तो कोई धारा सागर में बहता नहीं।
हमें खुशियां मनाने के लिए, साथियों का चाहिए होता साथ। हमें खुशियां मनाने के लिए, साथियों का चाहिए होता साथ।
सुख के हर इक अक्षर को, दुःख जाने कब धो जाये। सुख के हर इक अक्षर को, दुःख जाने कब धो जाये।
वो जब पास से निकल जाते मूर्ति भगवान सी महक उठती वो जब पास से निकल जाते मूर्ति भगवान सी महक उठती
हम सबकी खुशियों में जिसने हमेशा से खुशी मनाई थी, परिवार संग जीवन की हर एक रीति उसने न हम सबकी खुशियों में जिसने हमेशा से खुशी मनाई थी, परिवार संग जीवन की हर एक री...