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Ritesh Maurya

Classics

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Ritesh Maurya

Classics

बसंत

बसंत

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अब तुम ही हो उम्मीद,

अगले बसंत तक की,


कहीं तुम भी न साथ छोड़ देना,

इस बदलती दुनिया की तरह।।


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