अरमान
अरमान
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हमने जो देखे थे अरमान,
धीरे–धीरे अब चकना चूर होंगे,
हमारे भी थे कुछ दस्तूर,
तुम्हारे भी थे कुछ दस्तूर
तुम्हारा भी किसी की बाहों में घर होगा,
हम भी किसी की मांग का सिंदूर होंगे
