कामयाबी
कामयाबी
कामयाबी की चाह में,
इस राह में कहीं भटक गई हूँ।
कामयाबी सुकून देगी,
इसी विचार से बेचैन हो रही हूँ।
हर दिन खुद को बेहतर बना तो रही हूँ,
पर विवश मन के किसी कोने में खुद से नाराज़ हो गई हूँ।
कल को बेहतर बनाने में,
आज का बेहतर हरपल चिंतित मन से व्यतीत कर रही हूँ!
