STORYMIRROR

DR ARUN KUMAR SHASTRI

Classics

4  

DR ARUN KUMAR SHASTRI

Classics

रंगे अमन

रंगे अमन

1 min
269

नई दुनिया बसाना चाह्ता हुँ 

तेरे नज़दीक आना चाह्ता हूँ अमन के वास्ते मैं ये

परिन्दा उड़ाना चाह्ता हूँ कोई भी गैर होकर

नहीं होता मुकम्मल मैं गैरों से अपना


रिश्ता निभाना चाह्ता हूँ सुना है इस जहाँ में

सभी तो एक जैसे हैं मैं इस एकपन को

हकीकते अमल पाना चाह्ता हुँकभी सोचा न होगा

मगर अब आरजू है मैं इस आरजू ये दिल


को बताना चाह्ता हुँ कोई हैरान होगा

कोई गुस्सा भी होगा कोई बिछुड़ेगा मुझसे

कोई नाराज होगा अमन के वास्ते मैं ये

परिन्दा उड़ाना चाह्ता हूँ  नई दुनिया बसाना चाह्ता हूँ

तेरे नज़दीक आना चाह्ता हूँ।


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Classics