मन
मन
सबुद्ध जाने मन स्वयं को प्रतिक्रिया देखी गेरजन की,
निर्बद्ध हो जावे जब लगे लाठी अहम् मुरत पे तो ,
परिभाषा बदल जाये बुद्धि की हरेक क्षेत्र मे ज़ब,
आवे बात स्वयं पे, फिर दोषी होवें अन्य ही,
क्षमता मे ना रख सके चित को,
फिर भी समजे बुद्धिमान स्वयं को मनुष्य!
