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अधिवक्ता संजीव रामपाल मिश्रा

Tragedy

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अधिवक्ता संजीव रामपाल मिश्रा

Tragedy

काबिल नहीं जो इश्क़ दुनिया के

काबिल नहीं जो इश्क़ दुनिया के

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दिल लगाने की सजा है बेवफाई,

ऊपर से मां बाप की है रुसवाई।


प्यार में जान न दो सम्मान दो,

हर तरह से जिओ न इल्जाम दो।


काबिल नहीं इश्क़ जो दुनिया के,

ऐसे इश्क़ को फौरन लगाम दो।


दर्द वो नहीं झेलते जो चले जाते हैं,

दर्द वो झेलते जो यहां रह जाते हैं।


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