जुगनू से तुम
जुगनू से तुम
जीवन के अंधियाले तमस में--
तुम जुगनू सा मुस्काए,
पल भर-- प्यार
की रोशनी करके
फिर गहन अंधेरा छाए,
जलते बुझते
जुगनुओं सा---
प्रेम तुम्हारा भी होता है---
ना आता है--
ना जाता है--
बस हल्का सा--
इशारा देता है,
जुगनू जैसे --जलता बुझता,
वैसे ही तुम हो गए हो--इस
गहन तमस की
कारा में,
जुगनू से जलते बुझते हो,
जुगनु सी क्षीण रोशनी सम्
प्यार तुम्हारा भी है---जानम्
इस नीम रोशनी की
लीक पर ही--
अब जीवन सारा
चलना है--
इन गहन
अंधेरों में भी--
आस का पंछी उड़ता है---
जीवन की दुर्गम
राहों में जब---
प्यार तुम्हारा---
जुगनू बनकर चमकता है!!

