Become a PUBLISHED AUTHOR at just 1999/- INR!! Limited Period Offer
Become a PUBLISHED AUTHOR at just 1999/- INR!! Limited Period Offer

Kalpesh Vyas

Tragedy

1  

Kalpesh Vyas

Tragedy

जोकर

जोकर

1 min
302



सर्कस में भी जोकर और ताश में भी जोकर 

सिधा दिल को छू कर, कुछ कहता है जोकर 


जो दिल बोले तू वो कर, दिल से कर तू जो कर, 

कुछ-न-कुछ हम को, सिखलाता है जोकर


तू हँसी का बन नोकर, दू:ख-दर्द को तू 'नॉ (No) कर'

अश्कों को छुपा कर, फँसता है यह जोकर


खा कर जग की ठोकर, बचाता है यह जोकर 

सबकुछ अपना खो कर, कुछ देता है जोकर 



Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Tragedy