ग्रंथसुमन
ग्रंथसुमन
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विद्या के उपवन में देखो पौधे प्यारे हैं उगे हुए ।
वो देखो पौधों पर कैसे ग्रंथसुमन हैं खिले हुए ।
मीठी महक उन फूलों की जादु कैसा हैं कर रही।
तितली जैसें विद्यार्थियों को आकर्षित हैं कर रही!
शहद के जैसे शब्दों का रसपान विद्यार्थी करेंगे।
ज्ञान के परागरज को भी वो आसपास में बिखेरेंगें।
ग्रंथसुमन एक दिन मुरझा के जमीन पर गीर जाएंगें।
उस से पहलें कई विद्यार्थी ज्ञानी बनकर उड जाएंगे।
