STORYMIRROR

Kalpesh Vyas

Abstract

3  

Kalpesh Vyas

Abstract

कॉरोना का डर

कॉरोना का डर

1 min
205

कॉरोना नामक वाइरस, तेज़ी से फैल रहा है

यह जानलेवा विषाणु, खुनी खेल खेल रहा है।

  

दुनियाँ का हर एक देश, चुनोती झेल रहा है

सोश्यल मीडिया में ज्ञानी, ज्ञान पेल रहा है।


मीडिया के लिए तो यह, चर्चे का विषय बना

रिसर्चकर्मी के लिए, खर्चे का विषय बना।


मास्क और सेनेटाइझर्स, महँगे मिल रहे है

कहीं पर मिल जाते हैं, कही विरल हो रहे हैं।


जो हाथ मिला कर मिलतें, वो हाथ जोड़ रहे हैं 

जो हाथ न धोतें थे, घीस(कर) हाथ धो रहे हैं।


जरा सी छींक आए तो, लोग घूर के देखते हैं  

सर्दी-खासी लगे तो, डाक्टर को ही मिलते हैं। 


Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Abstract