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भावना भट्ट

Romance

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भावना भट्ट

Romance

जो तुम...

जो तुम...

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जो इस नभ के मेघ बनो तुम

मैं धरा की वर्षा बन जाऊँ

जब-जब विष का पान करो तुम

मैं अमृत बूँद बन कर आऊँ


जो हृदय की रसधार बनो तुम

मैं पल्लवित कली बन खिल जाऊँ

जो पुष्प बन शृंगार करो तुम

मैं सुगंध सी बिखर जाऊँ


जो सागर सा गम्भीर बनो तुम

मैं शांत लहर बन समझाऊँ

जब-जब भयंकर क्रोध करो तुम

मैं प्रकृति सी मौन हो जाऊँ


जो पर्वत सा कठोर बनो तुम

मैं निर्झर सरिता बन जाऊँ

जब अपनी पीड़ा कह न सको तुम

मैं मरहम बन कर आऊँ


जो तपती धूप बनो तुम

मैं ठंडी छांव बन जाऊँ

जब सत्य मार्ग न खोज सको तुम

मैं पथ प्रदर्शक बन कर आऊँ


जो सुकोमल पत्र का रूप धरो तुम

मैं ओस बन कर निखर जाऊँ

जब-जब प्रेम की वर्षा करो तुम

मैं मग्न होकर भीग जाऊँ


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