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Sandeep Kumar

Abstract

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Sandeep Kumar

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जो तकलीफ है अभी वह निखर जाएगा

जो तकलीफ है अभी वह निखर जाएगा

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जरा धीरज तो धरो

राह निकल आएगा

कांटों से भरा जीवन

फूलों से सज जाएगा।।


जो तकलीफ है अभी

वह निखर जाएगा

सुबह का नया सूरज

देखना निकल आएगा।।


हौसला रख

जब राहों में डटे रह जाएगा

तकलीफ खुद ब खुद

पीछे छूट जाएगा।।


अपने जो आज छोड़ दिए हैं

देखना वह साथ आएगा

कर्म पथ पर बढ़ते रहो

ख्वाब ख्वाब पूरा हो जाएगा।।


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