STORYMIRROR

Sandeep Kumar

Romance Fantasy Inspirational

4  

Sandeep Kumar

Romance Fantasy Inspirational

जो कल तक हंसता था

जो कल तक हंसता था

1 min
335

जो कल तक हंसता था

अगर आज वह मौन है

तो समझ जाना

इसका दिल हो गया गौन है।।


कोई उड़ा दी है निंद इसका

अब आता निंद नहीं निंद ढोंग है

उसका काया ना उसके साथ है

वह धूम रहा उस जोन में है।।


वह बेहोश मगरुर चुर चुर 

दिखता जैसे रोश में है

वह नशा ही ऐसा है कि 

रह पाता ना कोई होश में है।।


खो देता है सारा आलम

हो जाता बेहोश है

डेबिट क्रेडिट खाली कर देता 

तब आता होश में है।।


तब तक बहुत देर हो जाता 

खो जाता सारा आलम है

बन जाता बुद्धू भैया 

तब समझ में आता हम बालक है।।


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Romance