ज्ञान और धन
ज्ञान और धन
जिसने अपने पूरे जीवन में।
अपना पूरा समय व्यर्थ गंवाया।
ना ज्ञान पाया, ना धन कमाया।
वह संसार में कुछ ना कर पाया।
क्योंकि वह कुछ ना समझ पाया।
और ना ही कुछ धन कमा पाया।
जिसने अपने पूरे जीवन में।
केवल धन ही धन कमाया।
मगर कुछ ज्ञान ही नहीं पाया।
स्वयं को पूर्णतः अज्ञानी पाया।
कुछ जान समझ ही नहीं पाया।
केवल धन से ऊंचा स्थान पाया।
जिसने अपने पूरे जीवन में।
केवल ज्ञान और ज्ञान पाया।
धन तो बिल्कुल नहीं कमाया।
किताबी ज्ञान से उबर ना पाया।
उससे आगे कुछ नहीं देख पाया।
कुछ अनुभव भी नहीं कर पाया।
जिसने अपने पूरे जीवन में।
ज्ञान और धन दोनों कमाया।
उसने जीवन में संतुलन बनाया।
सब कुछ जान समझ भी पाया।
धन भी संतोष जनक कमाया।
समाज में सही सम्मान भी पाया।
याद रखो कि अपने जीवन में।
ज्ञान और धन का सही संतुलन रहे।
ज्ञान धन के बिना काम का नहीं।
बिना ज्ञान के, धन का ना चलन रहे।
लक्ष्मी और सरस्वती दोनों का।
स्थान घर और जीवन में रहे।
आवश्यक हैं दोनों का ही होना।
इनके बिन अंधेरा जीवन में रहे।
