STORYMIRROR

Pooran Bhatt

Abstract

4  

Pooran Bhatt

Abstract

शायर

शायर

1 min
257


कुछ अकेली सी कविताएँ..

कुछ नन्ही सी शायरी..

मेरे झोले में मिलेंगीं

शब्दों से रंगी डायरी..

कुछ किताबें होंगी..

कुछ पुराने पते यारों के..

कुछ धुंधलें निशान होंगे..

बीत गई बहारों के..

शायर हमेशा ऐसे ही होतें हैं..

दुनिया से दूर..

तुम कोई औऱ ढूंढ़ लो..

जिसके झोले में...

नोटों की बारिश होती हो।


Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Abstract