"जिंदगी तू अजीब है"
"जिंदगी तू अजीब है"
मेरी जिंदगी तू भी बड़ी अजीब है
गम देती उनसे जो बेहद करीब है
अब उन्हें क्या कहूं, इस ज़माने में,
जिनसे जुड़ी रिश्तों की जमीन है
वो दे रहे भीतर जख्म, गम्भीर है
जिन्हें मान रहे है, अपना नसीब है
अरे जिंदगी तू तो बड़ी गरीब है
दरिया बीच हुई, सूखी जमीन है
मेरी जिंदगी तू भी बड़ी अजीब है
अपनो से पा रही गम बेहतरीन है
तू बता कैसे बनाऊं तुझे हसीन है?
अपनों ने खोद रखी मेरी नींव है
पर बदलूंगा जिंदगी तुझे एक दिन है
मेरे हस्त में भी स्वाभिमान लकीर है
कोई कितना कहे, मुझे बदनसीब है
बनाऊंगा अपनी जिंदगी नाजनीन है
अपने दम पर करूंगा इसे नवीन है
चाहे अपने कितने फाड़े कमीज है
दूंगा साथ सच का जो ताजातरीन है
खुद की खुदी से मिटाऊंगा तम हीन है
तोड़ दूंगा वो सब रिश्तों की जंजीर है
जो देती मोह, तम, ईर्ष्या की बहिन है
मेरी जिंदगी तू कितनी ही हो अजीब है
में बरकरार रखूंगा सदा सत्य-तमीज है।
