STORYMIRROR

निखिल कुमार अंजान

Classics

3  

निखिल कुमार अंजान

Classics

जिंदगी से लफड़े चल रहे हैं

जिंदगी से लफड़े चल रहे हैं

1 min
632

आजकल बड़े लफड़े चल रहे हैं

जिंदगी के जिदंगी से जाने क्यों

बिन बात के झगड़े चल रहे हैं।


उदासी मे भी ये लब मुस्कुराते हैं

कुछ किस्से कितने भी पुराने हो

चाहकर भी भूले नहीं जाते हैं।


माना की खफा है वो भी और तुम भी

मनाने से बेहतर तो हम तंहा ही सही है

तन्हाई मे वक्त भी होगा और तेरी याद भी।


चलो छोड़ो अब किस्सा यहीं खत्म करते हैं

आखिरी बार आँखों मे आँखें डाल देख मेरी

जिंदगी तुझसे जिंदगी की आखिरी जंग का 

हम ऐलान करते हैं।


Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Classics