STORYMIRROR

Noor Jahan

Tragedy

4  

Noor Jahan

Tragedy

ज़िन्दगी की हकीक़त

ज़िन्दगी की हकीक़त

1 min
249

क्या कहे और कैसे इस ज़िन्दगी की हकीक़त

कुछ भी नहीं इस में झूठ है सारी हकीक़त

वो जो एक बेचारी लाचार सी औरत होती है 

कितने दुखों को सीने में दबाए हुए फौलाद बनी होती है

एक अकेली औरत कितनों को पाल लेती है 

हर बच्चे को एक नजर से लड प्यार देती है 

वाह री दुनिया और वह नसीब वाले औलाद 

तुझे तो मिली इसी दुनिया में इतनी प्यारी जन्नत है

पर तू ने तो इसी की ज़िन्दगी जहन्नुम बनाई है 

वाह क्या तेरी भी हिम्मत देखने में आई है

उस मे ने हर बच्चे को एक सी लाड़ दी ममता लुटाई है 

और जब तेरी बारी आई तूने अपनी रंग ही दिखाई है ।


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Tragedy