STORYMIRROR

Noor Jahan

Classics

4  

Noor Jahan

Classics

ज़िन्दगी

ज़िन्दगी

1 min
277

कौन कहता है ज़िन्दगी का कोई मोल नहीं 

ज़रा उनसे पूछें जो आपकी

जैसी ज़िन्दगी की चाहत रखते हैं 


ज़िन्दगी यूं ही ख़तम करने का नाम नहीं 

हम क़ूदरत के नियम भूल क्यूं जाते हैं 

यह तो जहांन -ए-फानी है बचा यहाँ कोई नहीं 

हमें अपने कर्मो को है पूरा करना, है भूलना नहीं 


हमें किस नें हक़ दे दिया इसे ख़त्म करने का 

यह हक़ तो खूदा ने किसी को भी दिया नहीं।


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Classics