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कवि काव्यांश " यथार्थ "

Tragedy Inspirational

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कवि काव्यांश " यथार्थ "

Tragedy Inspirational

ज़िन्दगी है धूप-छांव

ज़िन्दगी है धूप-छांव

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ज़िंदगी की धूप-छाँव।।


चलो कुछ लम्हे ठहर जाएँ,

ख़्वाबों की गलियों में खों जाएँ।

जहाँ उम्मीदें सूरज बन चमकती हैं,

और यादें चाँदनी बन बहकती हैं।


कभी बरसात के मोती संग भीगें,

कभी ठंडी हवाओं में गीतों संग झूमें।

कभी ख़ुशबू बन बिखर जाएँ,

कभी अश्कों सें मोती ढूँढ लाएँ। 


ज़िंदगी तो बहता दरिया है,

हर मोड़ पे एक नया सवेरा है।

कभी अँधेरों में दीप जलाना,

कभी प्यार में दर्द को भुलाना।


ये जिन्दगी है प्यारे,

बस यूं ही हमें है चलते जाना,

ख़ुद को हर लम्हा है अपनाना।

खुशियों को हर दिल में हैं पिरोना,

हर चेहरे पर मुस्कान है लाना।


यही तो है जीवन

जीवन को कुछ

इस तरह से हमें बिताना।

हर दुख दर्द हमें बेजान लगे।।



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