STORYMIRROR

Saraswati Aarya

Romance

4  

Saraswati Aarya

Romance

जिंदा एक जहान

जिंदा एक जहान

1 min
455

आपकी जिह्वा से निकले हर एक शब्द में

जिंदा एक जहान है

अकेला और तन्हा सा

मेरे जीवन का हर छोर था

महफ़िलों से परे

तन्हाई का अंधेरा सा घनघोर था

जिसमें अपनेपन की नदी उमड़ती 

आपके शब्द वो अरमान हैं

आपकी जिह्वा से निकले

हर एक शब्द में

जिंदा एक जहान है

मैंने प्रीत सुनी तो बहुत 

हीर - रांझा, लैला -मजनूँ की

पर पाई नहीं 

सूरज की रोशनी और

रात के जुगनू सी 

जिसे सुनकर मैं आँगन सी भीग रही

आपके शब्दों को बादलों का वरदान है

आपकी जिह्वा से निकले

हर एक शब्द में

जिंदा एक जहान है

मेरी आँखों में सपने पलते हजार

जीवन रूपी इस धरती में

उम्मीदों की कतार

मेरी उम्मीदों, मेरे सपनों को उंगली

पकड़ जो थाम ले

आप वो कद्रदान हैं

आपके शब्दों में

जिंदा एक जहान है ।



Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Romance